
हमसे तो कुछ हुआ नहीं
अब जनता से ही उम्मीद है कि
वह इस ज़ालिम सरकार को हटा दे
हटा दे उस सरकार को
जो नफ़रत फ़ैलाती है
झूठ बोलती है
दंगे करवाती है
इस देश के बुद्धिजीवी अपील करते हैं ग़रीब जनता से
हटा दो इस घृणित सरकार को
नफ़ीस अंग्रेज़ी में लिखी विज्ञप्ति पर हस्ताक्षर करते हैं कवि लेखक सम्पादक अध्यापक प्रोफ़ेसर कुलपति वकील दार्शनिक अर्थशास्त्री समाजशास्त्री पत्रकार भूतपूर्व नौकरशाह
कई तो शाम को दिल्ली मैक्समूलर रोड स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में नफ़ीस स्कॉच के साथ फ्रान्सीसी मोब्लाँ क़लम से
हटा दो
इस फ़ासीवादी सरकार को
कहीं नहीं है आत्मग्लानि
कहीं नहीं है अपराध-बोध
कहीं नहीं है कनफ़ेशन
एक आँसू तक नहीं
यह भारतीय बुद्धिजीवियों की भारतीय जनता के नाम एक अपील है जो किसी आदेश की तरह लगती है
जबकि लिखा जाना चाहिये था कि हम कई तरह से पतित हैं और वज़ीफ़ाख़ोर हैं हमारी आत्मा मर चुकी है अब सिर्फ़ भारत की अभागी जनता से ही उम्मीद है
हटा दो
इतिहास की इस निकृष्टतम सरकार को हटा दो !
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krishnakalpit@gmail.com
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