
भँडेतों से बचो ये सिंह को जोकर बना देंगे
पुजारी शिष्य तुमको पूजकर पत्थर बना देंगे
यहाँ आओ ज़रा बैठो कबीरों के मुहल्ले में
पिलाकर ज़हर का प्याला तुम्हें शंकर बना देंगे
कहाँ कासी कहाँ दिल्ली कहाँ सागर कहाँ जोधा
जहाँ हम साथ चल देंगे वहीं मगहर बना देंगे
तुम्हारे पास सब कुछ है शिवाला भी पियाला भी
कभी इस ओर भी देखो अमिट अक्षर बना देंगे
सुनी होगी बहुत कविता सुनो अब कृष्ण की कविता
कभी कूजा बना देंगे कभी सागर बना देंगे!
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krishnakalpit@gmail.com
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