
(१)
नया भारत बनाओगे
तो पुराने को कहाँ फेंक कर आओगे
तुम्हारे स्मार्ट-शहरों में कैसे रहेगा
मेरे जैसा पिछड़ा आदमी
मेरी पुरानी साइकिल का क्या होगा
जिसे मैं आज भी चलाता हूँ
कभी दूध कभी दवाई कभी सब्ज़ी लाता हूँ
पुराने डाकघर के पास जो हमारा घर था
वह किसके पास होगा भविष्य में
क्या उस खण्डहर को मटियामेट कर दिया जायेगा
जहाँ लिया था प्रथम चुम्बन का स्वाद
क्या पुराने पते पर आई सभी चिट्ठियाँ लौट जायेंगी
क्या नये भारत में सभी पुरानी स्मृतियाँ नष्ट कर दी जाएंगी
क्या तुम्हारे नये अस्पतालों में नहीं होगा
मेरी माँ के पुराने गठिया का इलाज़
मुझे नहीं चाहिये नया भारत
मैं पुराने भारत में रोता हुआ प्रसन्न हूँ
मैं अपने प्यारे और पुराने भारत में किसी कोने में पड़ी
एक गठरी की तरह रहना चाहता हूँ!
(२)
एक प्रचंड रासलीला है
और हिंसा का तांडव
क़बीलों का देश है
जिसे तुम हिंदुस्तान कहते हो
जिस ९० प्रतिशत जनता को तुम मूर्ख समझते हो
वह तुम्हें मूर्ख समझती है
एक लहू का दरिया है लहराता हुआ
यह सपेरों की विशाल बस्ती है
जोगियों का डेरा
शिवजी की पूरी बारात
बुद्धिजीवियो
यह नक़्शा तुम्हारी समझ नहीं आ सकता
एक दिन तुम्हारी कारों के शीशे तोड़ डाले जायेंगे!
(३)
नये भारत में
नये शराबख़ाने होंगे चमचमाते हुये
नयी होंगी साक़ीबालायें
नये होंगे कूजे
नये होंगे पियाले
नये होंगे शराबी
नये भारत में कहाँ जायेंगे पुराने शराबी
छप्पड़ के नीचे चलने वाला
रामसिंह का मदिरालय क्या उजड़ जायेगा
क्या दाल की पकौड़ियाँ बननी बन्द हो जायेंगी नये भारत में और वह धनिये की चटनी
क्या नये भारत में उजाड़ दिया जायेगा उन मालनों को
जो काली मिर्च डालकर फलों की चाट बेचतीं हैं
क्या नये भारत में सिर्फ़ मेट्रो और बुलेट-ट्रेन चलेंगी
क्या मेरी साइकिल नहीं टकरायेगी मेरी प्रेमिका की साइकिल से नये भारत में?
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krishnakalpit@gmail.com
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